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| 15 जनवरी के बाद WhatsApp पर बंद होगा Microsoft Copilot: Meta की नई पॉलिसी ने बदल दिए नियम |
15 जनवरी के बाद WhatsApp पर बंद होगा Microsoft Copilot: Meta की नई पॉलिसी ने बदल दिए नियम
डिजिटल दुनिया लगातार बदल रही है और इसी बदलाव का ताज़ा असर अब उन यूज़र्स पर पड़ने जा रहा है, जो WhatsApp के जरिए Microsoft Copilot का उपयोग करते थे. लंबे समय से यूज़र्स अपने रोज़मर्रा के सवाल, काम और टास्क्स को आसान बनाने के लिए कॉपायलट को व्हाट्सएप पर इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन Meta की नई पॉलिसी के चलते यह सुविधा अब खत्म होने वाली है. 15 जनवरी के बाद से WhatsApp पर Copilot के साथ चैट करने का विकल्प पूरी तरह से बंद हो जाएगा, जिसका मतलब है कि अब WhatsApp किसी भी General-Purpose AI चैटबॉट को अपनी Business API के माध्यम से चलाने की अनुमति नहीं देगा.
इस बदलाव की वजह से हजारों यूज़र्स को अपनी चैटिंग आदतों में बदलाव करना पड़ेगा क्योंकि Microsoft ने साफ कर दिया है कि Copilot को WhatsApp से हटाना मजबूरी है, न कि कोई कंपनी का निर्णय. इससे पहले OpenAI और Perplexity भी ऐसे ही नियमों के चलते अपने AI बॉट्स को WhatsApp से हटा चुके हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि WhatsApp के माध्यम से की गई चैट हिस्ट्री Copilot ऐप या वेब वर्ज़न में ट्रांसफर नहीं होगी, इसलिए यूज़र्स को 15 जनवरी से पहले अपनी चैट्स एक्सपोर्ट करके सेव कर लेनी चाहिए.
WhatsApp पर Copilot बंद क्यों हो रहा है? Meta की नई पॉलिसी का बड़ा असर
Meta ने पिछले महीने अपनी WhatsApp Business API के नियमों में बड़ा अपडेट किया था. इन नियमों के तहत अब WhatsApp प्लेटफॉर्म पर Generic AI चैटबॉट्स को ऑपरेट करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. Meta का स्पष्ट कहना है कि WhatsApp Business API का उद्देश्य केवल बिजनेस और उनके ग्राहकों के बीच कनेक्शन बनाना है, न कि AI चैटबॉट्स को डिस्ट्रिब्यूट करना.
इसी नियम के लागू होने के बाद सबसे पहले OpenAI ने ChatGPT को WhatsApp से हटाने का ऐलान किया, उसके कुछ दिनों बाद Perplexity ने भी अपने AI बॉट को हटाया. अब इसी कड़ी में Microsoft ने भी Copilot को WhatsApp से हटाने का फैसला लिया है, जिससे AI चैटिंग के शौकीनों पर बड़ा असर पड़ने वाला है.
Copilot कैसे इस्तेमाल होता था और Meta ने इसमें क्या दिक्कत देखी?
Microsoft के मुताबिक, WhatsApp पर Copilot बिना लॉगिन यानी अनऑथेंटिकेटेड एक्सेस के जरिए इस्तेमाल किया जा रहा था. इसका मतलब था कि यूज़र्स सीधे चैट शुरू कर देते थे और किसी कस्टम ऑथेंटिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती थी.
Meta को इसी मॉडल से समस्या थी क्योंकि WhatsApp Business API को इस तरह के AI चैटबॉट्स की अनुमति नहीं है. यही वजह है कि Microsoft को मजबूरन Copilot को WhatsApp से हटाना पड़ा.
15 जनवरी से पहले चैट हिस्ट्री कैसे बचाएं?
Microsoft ने यूज़र्स को चेतावनी दी है कि WhatsApp पर Copilot की चैट हिस्ट्री नए Copilot ऐप या वेब वर्ज़न में ट्रांसफर नहीं होगी. इसलिए अगर आप अपनी कोई जरूरी जानकारी या बातचीत भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आपको WhatsApp का “Export Chat” फीचर इस्तेमाल करना होगा.
चैट हिस्ट्री सेव करने के लिए महत्वपूर्ण कदम:
WhatsApp खोलें
Copilot की चैट खोलें
Three Dots मेनू पर टैप करें
More पर जाएं
Export Chat से अपनी हिस्ट्री सेव कर लें
अब Copilot का उपयोग कैसे होगा?
माइक्रोसॉफ्ट ने विकल्प भी प्रदान किया है. 15 जनवरी के बाद यूज़र Copilot का इस्तेमाल केवल दो तरीकों से कर सकेंगे:
Copilot की आधिकारिक मोबाइल ऐप
Copilot का वेब वर्ज़न
उन यूज़र्स के लिए यह बदलाव थोड़ा मुश्किल हो सकता है जो WhatsApp पर ही सभी काम करना पसंद करते थे. लेकिन Meta के नए नियमों ने यह साफ कर दिया है कि WhatsApp अब AI चैटबॉट्स का प्लेटफॉर्म नहीं रहेगा.
Meta क्यों नहीं चाहता कि WhatsApp AI चैटबॉट प्लेटफॉर्म बने?
WhatsApp दुनिया का सबसे बड़ा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है, जहां कंपनी सुरक्षा, प्राइवेसी और बिजनेस कम्युनिकेशन को प्राथमिकता देती है. Meta का मानना है कि General AI चैटबॉट्स WhatsApp Business API के उद्देश्य से मेल नहीं खाते और इससे प्लेटफॉर्म का मूल उपयोग प्रभावित होता है.
इसलिए Meta ने WhatsApp को एक AI-बॉट-फ्री प्लेटफॉर्म बनाने का निर्णय लिया है.
MCQ Quiz (उत्तर सहित)
Q1. 15 जनवरी के बाद WhatsApp पर Copilot क्यों बंद हो जाएगा?
A. Microsoft की इंटरनल पॉलिसी
B. WhatsApp सर्वर समस्या
C. Meta की नई Business API पॉलिसी
D. Copilot की कम यूज़र संख्या
Answer: C
Q2. Copilot की चैट कहाँ ट्रांसफर नहीं होगी?
A. Gmail
B. Copilot ऐप या वेब वर्ज़न
C. Telegram
D. Google Drive
Answer: B
Q3. WhatsApp पर Copilot किस प्रकार से इस्तेमाल हो रहा था?
A. प्रीमियम लॉगिन
B. अनऑथेंटिकेटेड एक्सेस
C. QR लॉगिन
D. फेस-आईडी एक्सेस
Answer: B
Q4. Meta WhatsApp Business API किसके लिए उपयोग करना चाहता है?
A. गेमिंग
B. बिजनेस-टू-कस्टमर सर्विस
C. AI मॉडल ट्रेनिंग
D. सोशल मीडिया मैनेजमेंट
Answer: B
Q5. Copilot का उपयोग आगे कैसे होगा?
A. केवल WhatsApp पर
B. केवल Facebook पर
C. Copilot ऐप या वेब वर्ज़न पर
D. Instagram चैट पर
Answer: C
FAQs (People Also Asked)
Q1. WhatsApp से Copilot हटने के बाद क्या यूज़र्स AI चैटिंग नहीं कर पाएंगे?
यूज़र्स AI चैटिंग कर पाएंगे, लेकिन WhatsApp पर नहीं. Meta के नियमों के बाद WhatsApp किसी भी AI चैटबॉट को सपोर्ट नहीं करेगा. लेकिन Microsoft ने Copilot ऐप और Copilot वेब प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाए हैं जहां पहले जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी. यूज़र को सिर्फ प्लेटफॉर्म बदलना होगा.
Q2. क्या ChatGPT भी WhatsApp पर उपलब्ध नहीं रहेगा?
हाँ, OpenAI ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि ChatGPT को जनवरी से WhatsApp से हटा दिया जाएगा. Meta की नई पॉलिसी के बाद कोई भी General AI चैटबॉट WhatsApp पर काम नहीं कर सकेगा, इसलिए ChatGPT भी इसका हिस्सा है.
Q3. WhatsApp चैट हिस्ट्री कैसे एक्सपोर्ट की जा सकती है?
यदि यूज़र Copilot की पुरानी चैट सेव करना चाहते हैं, तो WhatsApp में Export Chat विकल्प उपलब्ध है. इसके तहत चैट को फाइल के रूप में सेव किया जा सकता है. यूज़र इसका उपयोग ईमेल, ड्राइव या लोकल स्टोरेज में बैकअप रखने के लिए कर सकते हैं.
Q4. क्या WhatsApp पर कोई दूसरा AI चैट मॉडल उपलब्ध रहेगा?
Meta की पॉलिसी के अनुसार नहीं. नई Business API गाइडलाइन के बाद WhatsApp किसी भी General-Purpose AI चैटबॉट को प्लेटफॉर्म पर अनुमति नहीं देगा. यानी Copilot, ChatGPT या कोई अन्य AI चैटबॉट WhatsApp पर उपलब्ध नहीं रहेगा.
Q5. Copilot ऐप में क्या अतिरिक्त फीचर्स मिलेंगे?
Copilot ऐप में WhatsApp की तुलना में ज़्यादा फीचर्स मिलते हैं जैसे एडवांस्ड रिसर्च सहायता, डॉक्यूमेंट एनालिसिस, इमेज जेनरेशन और लॉगिन-सिंक फीचर्स. इससे यूज़र्स अपनी चैट्स को सुरक्षित रख सकते हैं और ऑथेंटिकेटेड अनुभव प्राप्त करते हैं.
निष्कर्ष
Meta की नई WhatsApp Business API पॉलिसी ने AI चैटबॉट कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. इसी बदलाव के चलते Microsoft Copilot भी WhatsApp से हट रहा है. हालांकि यह बदलाव उन यूज़र्स को प्रभावित करेगा जो WhatsApp पर Copilot का उपयोग करते थे, लेकिन कंपनी ने उचित विकल्प प्रदान किए हैं. Copilot ऐप और वेब वर्ज़न के माध्यम से यूज़र्स पहले जैसी ही सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे. बदलाव कठिन होता है, लेकिन डिजिटल दुनिया में यह आम बात है और कंपनियां लगातार सुरक्षा, प्राइवेसी और बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस को ध्यान में रखकर फैसले लेती रहती हैं.

